नींबू के पौधे की देखभाल के महत्वपूर्ण टिप्स, ऐसे होगी फ्लावरिंग और फ्रूटिंग

नींबू के पौधे की देखभाल के महत्वपूर्ण टिप्स, ऐसे होगी फ्लावरिंग और फ्रूटिंग





नींबू का पौधा ऐसा है कि इसकी जरूरत कमोबेश हर घर में ही पड़ती है. 

वास्तव में देखा जाए, तो नींबू ना केवल स्वाद के लिए, बल्कि कई बार दवाइयों के भी काम आता है. इसके साथ-साथ वह सलाद हो, चाहे लाल चाय हो, कई बार तो दाल में भी, नींबू का प्रयोग कई प्रकार से होता है.

बात करें पौधे की, तो गांव में हम खाली जगहों पर नींबू के पौधे को लगा देते हैं, और बढ़िया फ्रूटिंग पाते हैं, लेकिन मुश्किल तब होती है, जब शहरों में, बेहद कम जगह में इसे लगाना पड़ता है. कई जगहों पर तो ज़मीन होती ही नहीं है. ऐसे में गमले, ग्रो बैग में या फिर पीवीसी पाइप (Lemon plants in PVC Pipes) में भी आप से बेधड़क लगा सकते हैं. 

इस क्रम में नर्सरी में जब भी आप जाते हैं, तो नींबू के पौधे में आपको काफी फ्लावरिंग और फ्रूटिंग दिखती है, लेकिन जब आप उन्हीं पौधों को घर पर लेकर आते हैं, तो आप पाते हैं कि बाद में उसमें ना तो फ्लावरिंग हो रही है, और ना ही फ्रूटिंग हो रही है. हो भी रही है, तो एक या दो जिससे कि आपका मन खट्टा हो जाता है. 

यानी नींबू का स्वाद बेशक खट्टा होता है, और उससे आपको टेस्ट आता है, लेकिन वह जब फल नहीं देता है, तो आपका मन खट्टा हो जाता है. तो आइए अपने मन को खट्टा होने से बचाते हैं, और खट्टे-खट्टे ढेर सारे नींबू को उगाते हैं.

दो तरह से लगा सकते हैं नींबू
Lemon Plants from Seeds or Grafted Method

सबसे पहले तो हमें यह समझ लेना चाहिए कि नींबू के पौधे दो तरीके से लगाए जाते हैं. एक बीज से और एक ग्राफ्टेड मेथड से!

अब इन दोनों में कई बार लोगों को अंतर समझ में नहीं आता होगा तो आप यह भी समझ लीजिए कि बीज से लगने वाला पौधा एक खास समय के बाद ही फ्रूटिंग देता है. जैसे कि नींबू का पौधा मान के चलिए कि 2 से 3 साल के बीच में वह फ्रूटिंग करता है. ऐसी अवस्था में कई लोग 3 साल तक इंतजार नहीं करना चाहते हैं, तो फिर वह ग्राफ्टिंग का मेथड अपनाते हैं. 

मूल रूप से तो सभी पौधे बीज से ही उगते हैं, किंतु जब कोई एक बीज वाला पौधा फ्रूटिंग देने लगता है, और उसकी नई ब्रांच निकलने लगती है, तो एक ब्रांच को ग्राफ्ट के मेथड से नये पौधे में कन्वर्ट किया जाता है. ऐसी अवस्था में ग्राफ्टिंग के बाद फ्रूटिंग के लिए 2 - 3 साल का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है, और वह अगले कुछ समय में ही फल देने लगता है. अर्थात ग्राफ्ट की हुई ब्रांच की एज आलरेडी पुरानी होती है, और वह तेजी से फ्रूटिंग देने लगती है.

हालांकि इस बात को जितनी आसानी से कह दिया गया है, करना उतना ही कठिन होता है. ऐसे में आप एक या दो नींबू के पौधे को आप ग्राफ्ट करना चाहते हैं, तो इससे बेटर यह रहेगा कि नर्सरी से आप खरीद लें, क्योंकि किसी फील्ड में एक्सपर्ट बनने के लिए एक लंबा समय लगता है, और हमें जब एक या दो नींबू ही उगाने है, तो उस फील्ड में एक्सपर्ट बनने की कोई आवश्यकता नहीं है, तो नर्सरी से ग्राफ्ट किया हुआ अच्छा पौधा आप लेकर लगा लें.

अब एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि आप नर्सरी से जो पौधा लाते हैं, वह प्रॉपर ग्राफ्टेड प्लांट होता है, जिसमें फ्रूटिंग फ्लावरिंग ऑलरेडी हुई रहती है. ध्यान दीजिये, अगर उसमें फ्रूटिंग नहीं है, तो यह भी हो सकता है कि वह बीज से निकला हुआ पौधा है, और फिर उसमें फ्रूटिंग होने में काफी समय लग जाए!

तो जिस पौधे पर अच्छी खासी फ्रूटिंग हो रखी हो, उसी पौधे को आप अपने Kitchen Garden के लिए लेकर आयें.

Lemon Plants in PVC Pipes

इस Grafted Plant में भी कुछ समय बाद फ्लावरिंग झड़ जाएगी, किंतु आपको इससे निराश नहीं होना है, और अगर आप चाहते हैं कि दोबारा उस पर फ्लावरिंग और फ्रूटिंग हो, तो न्यूट्रिशंस (Plant Nutrition) पर्याप्त मात्रा में दें. इस कड़ी में आप किसी नर्सरी से लाए हुए ग्राफ्टेड नींबू के पौधे को बड़े पोट में आप लगा लें. बल्कि अगर आप पाइप में भी लगाना चाहते हैं, तो 8 इंच या 10 इंच का पीवीसी पाइप इसके लिए सूटेबल रहेगा. इससे पतले पाइप में लगाने से निश्चित रूप से यह वह परिणाम नहीं देगा, जो आप एक्सपेक्ट करते हैं।

खैर, समय-समय पर आप अगर इसमें न्यूट्रिशन देते रहते हैं, जैसे कि 15 दिन पर आप वर्मी कंपोस्ट की एक निश्चित मात्रा दे दें. या फिर गोबर की पुरानी खाद अगर उपलब्ध है, तो उसे पानी में भिगोकर के लिक्विड फर्टिलाइजर बना करके आप उसे दे दें.

ध्यान दीजिए, अगर आपके नींबू में फूल आ रहे हैं, कलियां बन रही हैं, तो उसे पोटेशियम की जरूरत ज्यादा पड़ती है, नाइट्रोजन की कम. ऐसे में आप उसको वह खाद दें, जिसमें पोटेशियम ज्यादा हो. इससे आपके फूल झड़ेंगे नहीं. बेसिक रूप से आप यह समझ लीजिए कि नाइट्रोजन की जरूरत पत्तियों को हरा रखने के लिए, उसकी ब्रांचेज को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ऐसी अवस्था में जब कलियां लगती हैं, तब नाइट्रोजन की जरूरत कम से कम होती है, बल्कि उसे पोटैशियम की जरूरत अधिक होती है.

Lemon Flowering Cycle

नींबू के फ्लावरिंग के साइकिल को भी आप समझ लीजिए. साल में सामान्यतः तीन बार नींबू के पौधे में फ्रूटिंग होती है. पहली, दिसंबर से जनवरी के बीच, तो दूसरी बार मार्च और अप्रैल के महीने में फ्लावरिंग और फ्रूटिंग होती है, तो तीसरी बार जुलाई से अगस्त के बीच इसकी फ्रूटिंग और फ्लावरिंग होती है.

इन तीनों बार में जितनी फ्लावरिंग होती है, कोई आवश्यक नहीं है कि उतनी ही फ्रूटिंग भी हो. अर्थात कुछ-कुछ फूल झड़ जाते हैं, और कुछ-कुछ फ्रूट में कन्वर्ट हो जाते हैं.

ऐसी अवस्था में अगर आप के पौधे में प्रॉपर फ्रूटिंग नहीं आती है, तो उसकी प्रूनिंग (Prooning of Plants) करना एक बढ़िया विकल्प साबित होता है. अर्थात अगर कोई ब्रांच लंबी चौड़ी हो रही है, और उसमें फ्रूटिंग फ्लावरिंग नहीं हो रही है, तो आप उसकी प्रूनिंग कर दें, अर्थात कटाई छटाई कर दें, तो जो दूसरी ब्रांचेज निकलेंगी, वहां से आपको अच्छी ग्रोथ मिलेगी. यहाँ से आपको फ्रूटिंग और फ्लावरिंग आने की संभावना भी बढ़ जाएगी.

ध्यान रखिए जितनी ज्यादा ब्रांचेज होंगी, उतनी ज्यादा फ्लावरिंग होगी, और इससे ज्यादा फल लगने के चांस बढ़ेंगे. तो सामान्य भाषा में कहा जाए, तो पुरानी ब्रांचेज को कट करते जाइए, ताकि नई ब्रांच निकल सकें, क्योंकि अगर पुरानी ब्रांच ही बढ़ते रहेगी, तो बगैर फ्लावरिंग / फ्रूटिंग के ही प्लांट की सारी एनर्जी को सोख लेगी, और नई ब्रांचों को उभरने का टाइम ही नहीं मिलेगा.

Sunlight is Mandatory

एक और सावधानी की बात आप यह है कि नींबू के पौधे को प्रॉपर धूप लगना आवश्यक है. अगर धूप नहीं लगती है, तो इसमें कीड़े भी लगने लगते हैं, और इसमें प्रॉपरली फ्रूटिंग नहीं आ पाती है. ना केवल नींबू, बल्कि दूसरे सब्जियों या फलों के पौधे, जिसमें फूल और फल लगते हैं, उनको बिना पर्याप्त धूप के आप पर्याप्त फ्रूटिंग नहीं पा सकते हैं, तो इन Plants को Sunlight पर्याप्त मिले, इसका ध्यान रखना आवश्यक है.

Over Watering

ओवरवाटरिंग हम जानते हैं कि न केवल नींबू के लिए, बल्कि अधिकांश Vegetable/ Fruit Plants के लिए कितना नुकसान दायक है, क्योंकि Over Watering से रूट्स के गलने की संभावना जन्म ले लेती है, और ऐसी अवस्था में वह सड़ जाती हैं, तो धीरे-धीरे पौधा सूखने लगता है, पत्तियां सूखने लगती हैं. ऐसे में ओवरवाटरिंग से बचें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पौधे सूख जाए, बल्कि पौधों में नमी बरकरार रहनी चाहिए, ताकि पत्तियां खाना बना सकें, और पौधों को हेल्थी रख सकें.

Organic Fertilizers

खाद की बात करें, तो एनपीके 20 20 20 (NPK 20 20 20) इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. प्रत्येक सप्ताह में 1 टी स्पून 5 लीटर पानी के अंदर डालकर उसको स्प्रे किया जा सकता है. साथ ही मिट्टी के अंदर भी उसे ऐड किया जा सकता है.

हालांकि दिसंबर के महीने में आप द्वारा इन पौधों में एनपीके की मात्रा बदलनी पड़ती है, क्योंकि उस समय पौधे की ग्रोथ रुक जाती है, और उस समय कलियां लगने लगती हैं, तो उस वक्त आप एनपीके 5 15 और 45 की मात्रा में दीजिए.

कलियों के आते ही नाइट्रोजन की मात्रा कम कर देनी चाहिए, और पोटेशियम की बढ़ा देनी चाहिए. ऐसी अवस्था में ज्यादा नाइट्रोजन देने से फूल झड़ने लगते हैं, और उनके फल बनने की संभावना कम हो जाती है. ऐसे में एनपीके पाउडर सलूशन के रूप में आप 5 लीटर पानी में 1 टीस्पून डाल के स्प्रे और मिट्टी में दे सकते हैं.

उम्मीद है नींबू के पौधे की पर्याप्त जानकारी आपको इस लेख में मिली है, जिसके माध्यम से आप नींबू के पर्याप्त फल और फूल प्राप्त कर सकेंगे.

आप सभी से निवेदन है कि इस उपयोगी लेख को अपने फैमिली व्हाट्सएप ग्रुप में अवश्य शेयर करें, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके.

Article By: Veg Roof Team

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Hindi Article Title: Vegetable Kitchen garden information

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